प्रशासन की नींद भारी पड़ी,जाने क्या कहती है सहायक संचालक!!
सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्रों को स्कूल आने जाने में आसानी के लिए साइकिल दी जाती है योजना के तहत 9 वी की बालिकाओं को जो की एसटी एससी और बीपीएल वर्ग से आती हैं उन्हें राज्य शासन द्वारा साइकिल बाटी जाती हें.. साइकिल बांटने का काम स्कूल सत्र शुरू होने के साथ ही हो जाता है. लेकिन आधा सत्र बीत जाने के बाद भी अब तक घरघोड़ा ब्लॉक में एक भी साइकिल नहीं बाटी गई है जिले स्तर पर डिमांड ड्राफ्ट बनाकर शासन को भेजा जाता है इसके बाद साइकिल का इंस्टॉलेशन कर BEO की ओर से स्कूल में साइकिल बाटी जाती है आधा सत्र बीतने के बाद भी साइकिल नहीं मिलने से छात्राएं स्कूल पैदल जा रहे हैं आपको बता दे घरघोड़ा में 26 से अधिक स्कूल में 543 साइकिल वितरण होना है शासन से डिमांड के अनुसार पार्ट्स sages घरघोड़ा में रखवाया गया है लेकिन अब तक इंस्टॉलेशन करने वाले कर्मचारी नहीं पहुंचे हैं इधर आधा सत्र पूरा हो चुका है और इंस्टॉलेशन में भी समय लगना है ऐसे में छमाही परीक्षा के बाद शीतकालीन छुट्टी फिर उसके बाद परीक्षा का दबाव बढ़ जाएगा..
जब इस बारे में रायगढ़ के सहायक संचालक रूबी वर्गिस से पूछा गया तो उनका कहना था इस बारे में जानकारी नहीं है घरघोड़ा में अगर वितरण शुरू नहीं हुआ है तो इसकी जानकारी अधिकारियों से ली जाएगी
जिम्मेदार कौन?
घरघोड़ा ब्लॉक में 543 साइकिलों का स्टॉक होने के बाद भी वितरण न होना कई सवाल खड़ा करता है। इंस्टॉलेशन टीम अब तक क्यों नहीं पहुंची? बीईओ कार्यालय ने निगरानी क्यों नहीं की? और जिला स्तर पर योजना की प्रगति पर ध्यान किसका होना चाहिए था? आधा सत्र बीत चुका है, छात्राएं रोज पैदल स्कूल जा रही हैं-लेकिन सिस्टम में देरी की जिम्मेदारी किसकी है..इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है।





