पोरडा:- एसईसीएल अधिग्रहण से पहले गाँवों में अवैध निर्माणों की बाढ़!

 मुआवज़े की लालसा में बन रहे नए मकान, पुराने विस्थापित परिवारों का हक़ खतरे में

 साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की आगामी कोयला खनन परियोजना पोरडा चिमटापानी के लिए जिन गाँवों का सर्वे हो चुका है, वहाँ अचानक अवैध निर्माणों की होड़ मच गई है। सर्वेक्षण पूरा होने और ज़मीन तथा पुराने मकानों का मूल्यांकन हो जाने के बावजूद, कुछ बाहरी और स्थानीय तत्वों द्वारा रातों-रात नए मकानों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि वे उच्च मुआवजे और रोजगार पात्रता का लाभ उठा सकें। ग्रामीणों का आरोप है कि इन “मुआवज़ा माफियाओं” के कारण वास्तविक विस्थापितों और गरीब भू-स्वामियों का हक़ मारा जा रहा है, और पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ रही है।

सर्वे के बाद भी बे रोकटोक निर्माण

​SECL प्रबंधन ने खनन के लिए आवश्यक निजी और आम (शासकीय/वन) जमीनों का सर्वे कार्य पूरा कर लिया है, और विस्थापित होने वाले परिवारों की सूची तैयार की जा रही है। लेकिन, सर्वे टीम के जाने के बाद से ही, गाँव में उन ज़मीनों पर भी तेज़ी से निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जिन्हें जल्द ही अधिग्रहित किया जाना है।

​ग्रामीण:- “कंपनी ने हमारे पुराने घरों का सर्वे करके मूल्यांकन कर लिया है। अब कुछ लोग जल्दी-जल्दी नए पक्के मकान बना रहे हैं। ये लोग न तो गाँव के हैं और न ही इनकी ज़मीन वैध है। इनकी वजह से कंपनी की पूरी अधिग्रहण योजना रुक जाएगी, और जो असली गरीब विस्थापित परिवार हैं, उन्हें नौकरी या मुआवज़ा मिलने में और देरी होगी।”

​मुआवजा पाने का ‘गोरखधंधा’

सूत्रों के अनुसार, यह अवैध निर्माण मुख्य रूप से ऊँचे मुआवज़ा पैकेज पाने की लालसा से किया जा रहा है। ये लोग प्रशासन को दिखाने के लिए आनन-फानन में निर्माण कार्य पूरा करना चाहते हैं, ताकि वे “प्रभावित परिवार” की श्रेणी में आकर नौकरी या लाखों का मुआवज़ा हासिल कर सकें। आशंका जताई जा रहीं है कि शासकीय भूमि पर भी अवैध रूप से आलीशान ढाँचे खड़े किए जा रहे हैं।​ इस समाचार के प्रकाशन के बाद, स्थानीय प्रशासन को जल्द ही नए निर्माणों को रोकने और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई करनी चाहिए। यह कदम असली विस्थापितों के हितों की रक्षा और अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक है।