प्रभारी संजय पण्डा के खिलाफ जांच शुरू,पहले ही हटाने का भेजा गया था प्रस्ताव

घरघोड़ा आत्मानंद स्कूल विवाद में नया मोड़, जांच समिति के सामने बोले वंचित छात्र

 

NSUI ने सौंपा डीईओ का पुराना प्रस्ताव, कहा– ऐसे प्राचार्य को पद पर रखना छात्रहित के खिलाफ

 

आदित्य दासे बोले– योग्य छात्रों को ठुकराना तानाशाही, NSUI अब चुप नहीं बैठेगी

 

जांच समिति के सामने बोले छात्र, “योग्य थे, फिर भी नहीं मिला प्रवेश”

 

घरघोड़ा। आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, घरघोड़ा के प्रभारी प्राचार्य संजय पण्डा के खिलाफ एनएसयूआई द्वारा की गई शिकायत के बाद अब जांच की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा द्वारा गठित जांच समिति के समक्ष एनएसयूआई प्रतिनिधियों ने उन विद्यार्थियों को प्रस्तुत किया, जिन्हें विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने के बावजूद मनमाने तरीके से वंचित कर दिया गया था। छात्रों ने बताया कि उन्होंने सभी दस्तावेज़ समय पर जमा किए थे, और शासकीय शाला में प्रवेश के समय इंटरव्यू के कोई नियम नही है लेकिन प्राचार्य संजय पण्डा ने जानबूझकर बच्चो का इंटरव्यू लिया और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया और स्कूल में प्रवेश नहीं दिया। छात्रों ने इसे बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण बताया। एनएसयूआई का कहना है कि यह पूरा मामला बच्चों के भविष्य से जुड़ा है, और प्राचार्य द्वारा की गई यह कार्रवाई पूरी तरह मनमानी और छात्रविरोधी है। जांच समिति ने छात्रों के बयान दर्ज किए हैं और अब अन्य पक्षों के बयानों के साथ रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पूर्व में पंडा को हटाने भेजा गया था प्रस्ताव, NSUI ने दी प्रति जांच दल को

जांच के दौरान एनएसयूआई ने एक अहम दस्तावेज़ भी जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ द्वारा प्रभारी प्राचार्य संजय पण्डा को उनके पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव पहले ही उच्च कार्यालय (DPI) को भेजा जा चुका है। एनएसयूआई ने समिति को उस प्रस्ताव की प्रति भी सौंपी और सवाल उठाया कि जब अधिकारी पर पहले ही गंभीर सवाल उठ चुके हैं, तो उन्हें अब तक क्यों पद पर बनाए रखा गया है। संगठन ने यह भी कहा कि बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित करना न सिर्फ संवेदनशील मामला है, बल्कि एक शिक्षक की गरिमा के विपरीत भी है। एनएसयूआई ने मांग की कि ऐसे प्राचार्य को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए ताकि स्कूल का माहौल फिर से विद्यार्थियों के अनुकूल बन सके।

“प्राचार्य को हटाना ज़रूरी, नहीं तो संघर्ष होगा और तेज़” – आदित्य दासे

एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष आदित्य दासे ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति का सवाल नहीं है, यह उन बच्चों के भविष्य का मामला है जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के शिक्षा से वंचित कर दिया गया। योग्य छात्रों को इंटरव्यू के नाम पर बाहर करना एक तरह की तानाशाही है और हम इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे। हमने अपने बयान, बच्चों के बयान और सभी आवश्यक साक्ष्य जांच समिति को सौंप दिए हैं। अब यदि प्रशासन मौन रहता है, तो एनएसयूआई मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। हम छात्रहित की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।”