जल जीवन मिशन के कार्यों की मॉनिटरिं गकरने के लिए अधिकारी नहीं हैं। इसलिए कुछ ब्लॉकों में सब इंजीनियरों को ही एसडीओ का प्रभार दे दिया गया है। एक ही अधिकारी दो प्रभार पर रहने से फिल्ड वर्क की भी निगरानी नहीं हो पा रही है। ठेकेदार अपनी मनमानी से काम कर रहे हैं। मूल्यांकन और सत्यापन एक ही अधिकारी को करना है। इसलिए ठेकेदारों को गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं है। मनमाना काम हो रहा है और सब इंजीनियर सह एसडीओ मूल्यांकन, सत्यापन कर भुगतान भी करा रहे हैं।जिले में पांच साल पहले जल जीवन मिशन का काम शुरू हुआ था। तब सारंगढ़ जिला अलग नहीं हुआ था। जिले के 919 गांवों के 2 लाख 42 हजार 839 घरों में पानी पहुंचाने के लिए चिह्नांकित किया गया था। विभागीय साइट में किए गए दावे के अनुसार अभी तक 1 लाख 97 हजार 889 घरों में पानी पहुंचाया जा चुका है। लेकिन हकीकत में ज्यादातर जगह काम अधूरा है।इसकी मुख्य वजह जिम्मेदार पद पर प्रभार पर काम चलाना है। घरघोड़ा एसडीओ आरके टंडन का ट्रांसफर हो जाने के बाद सब इंजीनियर चौहान को एसडीओ का प्रभार दे दिया गया है। धरमजयगढ़ में एसडीओ सीएल कोरी के रिटायर होने के बाद 1 मार्च से जेई जेसी भगत को एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। राज्य से आने वाले अधिकारियों को भी इन क्षेत्रों में नहीं ले जाया जाता है।
जल जीवन मिशन की सबसे खराब स्थिति धरमजयगढ़, घरघोड़ा व तमनार एरिया में है। ये जिले के दूरस्थ क्षेत्र हैं। इसलिए यहां कोई देखने वाला नहीं है। ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करता है। इन्हीं क्षेत्रों में अधिकारियों की भी मनमानी चलती है।पानी आ रहा है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं करते दरअसल पानी पहुंचाने का ठेकेदारों का तरीका ही अलग है। वे लाभार्थी के घरों के सामने नल लगाकर चबूतरा बना देते हैं। उसके सामने उस व्यक्ति को खड़े करके फोटो व उसका आधार कार्ड ले लेते हैं। इसी प्रक्रिया के साथ ही ठेकेदार का काम पूरा हो जाता है। वास्तव में उस घर में पानी जा रहा है या नहीं, इसका सत्यापन करने के लिए पीएचई का कोई अधिकारी देखने नहीं जाता है। यही वजह है कि मिशन का लाभ जिले के लोगों को नहीं मिल पा रहा है।अगस्त 2019 से जिले में काम शुरू हुआ है, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने सर्वे कर घरों और गांवों को चिह्नांकित कर लिया है। 919 गांवों में काम कराना है, लेकिन अभी तक केवल 218 गांवों में ही काम पूरा हो पाया है। अभी भी जिले के 700 गांवों में कहीं पाइप लाइन डालने, कहीं टंकी बनाने तो कहीं सोर्स खोजने का काम चल ही रहा है। इसके बाद भी 81 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है।कार्य में प्रगति लाने के लिए काम किया जा रहा है
धरमजयगढ़, लैलूंगा एरिया में पानी की समस्या है। वहां के लिए प्रयास किया जा रहा है। उस एरिया में संपवेल बनाकर पानी की व्यवस्था की जाएगी। रिवाइज्ड एस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव भेजा जाएगा। डबल प्रभार का मामला शासन स्तर का है। हमारे पास सहायक अभियंता तक नहीं हैंसरकार से मांग की गई है।
परीक्षित चौधरी, ईई, पीएचई, रायगढ़





