जनता ने घेरा चौधरी हॉउस,सिल्लू भैया जिंदाबाद के लगे नारे

 

अध्यक्ष चुनाव लड़ने की माँग, भारी नारेबाजी

सैकड़ो महिला पुरुषों ने सिल्लू चौधरी को कहा जनता की पुकार

कांग्रेस से टिकट कटने के बाद क्या निर्दलीय लड़ेंगे चौधरी

घरघोड़ा नगर पंचायत में सियासी पारा चरम पर है। कांग्रेस पार्टी द्वारा अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी (सिल्लू भैया) का टिकट काटे जाने से नाराज़ जनता ने चौधरी हाउस को जनआंदोलन का केंद्र बना दिया है। सैकड़ों महिला-पुरुषों ने चौधरी के घर पर एकत्र होकर नारेबाजी की और उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने का दबाव बनाया।

“सिल्लू भैया जिंदाबाद” और “जनता की पुकार, सिल्लू चौधरी बार-बार” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। समर्थकों का कहना है कि चौधरी ने अपने कार्यकाल में घरघोड़ा के विकास के लिए अनगिनत कार्य किए, और कांग्रेस पार्टी द्वारा उनका टिकट काटा जाना जनता के साथ अन्याय है।

जनता की नाराजगी बनी ताकत

सुरेंद्र चौधरी के समर्थकों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता किसी भी पार्टी के उम्मीदवार से ज्यादा है। उन्होंने पिछले पांच सालों में क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार किए हैं।

एक महिला समर्थक ने कहा, “सुरेंद्र जी ने हमारी समस्याओं को दूर करने के लिए रात-दिन काम किया। अब जब पार्टी ने उन्हें नकारा है, तो हम उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ाकर उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे।”

सियासी गणित में उलटफेर की आहट

अगर सुरेंद्र चौधरी निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो यह मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय के बीच त्रिकोणीय बन सकता है। उनके समर्थकों का जोश और जनता का समर्थन इस बात का संकेत है कि चौधरी एक मजबूत उम्मीदवार बनकर उभर सकते हैं।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, “चौधरी की लोकप्रियता और जनता का समर्थन अगर इसी तरह बना रहा, तो यह चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।”

अब चौधरी के निर्णय पर टिकीं सबकी निगाहें

चौधरी फिलहाल जनता के इस दबाव पर विचार कर रहे हैं। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वे निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

जनता की अपील साफ है: “सिल्लू भैया को हर हाल में मैदान में उतरना होगा।” चौधरी का फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

घरघोड़ा की राजनीति इस वक्त अपने सबसे नाटकीय मोड़ पर है। क्या सुरेंद्र चौधरी जनता की आवाज सुनेंगे और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दांव खेलेंगे? या फिर वे कांग्रेस की राजनीति में ही रहकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे?

“सिर्फ समय बताएगा, लेकिन फिलहाल ‘चौधरी हाउस’ बदलाव का केंद्र बन चुका है।”