एसडीएम घरघोडा रमेश कुमार मोर ने मालिकराम राठिया को पाया निर्दोष,घपला सामने आया लेकिन दोषी तक नहीं पहुंच पा रहा बेबस प्रशासन
रायगढ़ जिले में घपले-घोटाले करके साफ बचकर निकल जाना बेहद आसान है। खुद प्रशासन ही इसके लिए रास्ता बनाता है। बजरमुड़ा घोटाले में भी कुछ ऐसा ही किया जा रहा है। पहले दो पूरा दोष दो पटवारियों पर डाला। दोनों को सस्पेंड किया। उसमें से एक को 20 दिन बाद ही बहाल कर दिया। अब दूसरे को भी बहाल करने की तैयारी की जा रही है।छग स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी को आवंटित गारे पेलमा सेक्टर-3 कोल ब्लॉक के भूअर्जन में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला किया गया है। बजरमुड़ा गांव में ही सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए गए। बाकी गांवों में तो अभी जांच भी नहीं हुई है।राज्य सरकार की जांच टीम ने रिपोर्ट में पूरी गड़बड़ी खोलकर रख दी है। मामला गंभीर हो रहा था इसलिए 21 अक्टूबर 2024 को पटवारी जितेंद्र पन्ना और मालिकराम राठिया को सस्पेंड किया गया था। एसडीएम रमेश कुमार मोर ने आदेश जारी किया था। इस कोल ब्लॉक में छग सरकार की राशि लगी है। मतलब घोटालेबाजों ने अपनी ही सरकार को ठगा है। अब उन दोनों पटवारियों में से एक मालिकराम राठिया को बहाल कर दिया है । दिए आदेश में एसडीएम घरघोड़ा ने कहा है कि अनुशसनात्मक कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। पदस्थापना अवधि के आधार पर यह पाया गया कि पटवारी को निलंबित रखना आवश्यक और औचित्यपूर्ण नहीं होगा। इसलिए 13 नवंबर को ही पटवारी को बहाल किया गया। सूत्रों के मुताबिक अब दूसरे चर्चित पटवारी जितेंद्र पन्ना को भी बहाल करने की तैयारी कर ली गई है। कुछ महीनों में यह भी साबित हो जाएगा कि बजरमुड़ा घोटाला किसी ने किया ही नहीं ।
सरकार ने पहले जांच कराई। रिपोर्ट भी राजस्व विभाग को सौंपी गई। अब उस रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की पहचान करने में प्रशासन के हाथ कांप रहे हैं। सीएसपीजीसीएल को आवंटित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर-3 कोल ब्लॉक के लिए मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. लीज स्वीकृत की गई। तत्कालीन एसडीएम घरघोड़ा अशोक मार्बल ने सर्वे करवाया। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 415.69 करोड़ का मुआवजा बांटा गया।असिंचित भूमि को सिंचित बताकर, पेड़ों की संख्या ज्यादा दिखाकर, टिन शेड को पक्का निर्माण बताकर,बरामदे कुएं आदि का मनमाना आकलन किया गया।





