कब तक एक अदद गार्डन के लिए तरसेगा घरघोड़ा
पेयजल की गर्मियों में विकराल होती है समस्या,समाधान की क्या होगी दिशा
सूखे गलों,उजाड़ गार्डन से मरते तालाबों तक सबको “नायक” का इंतजार
घरघोड़ा : चुनाव की सरगर्मियों के बीच घरघोड़ा नगर में राजनीतिक हलचल तेज हो चली है। विभिन्न दलों के प्रत्याशी अपनी चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं, लेकिन अब तक जनता से जुड़े ठोस वायदों की झलक नहीं दिखी है। भाजपा ने शहर के हृदय स्थल पर स्थित बगमुड़ा तालाब को मॉर्डन रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया है, लेकिन शहर के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनदेखे हैं।
बदहाली पर आंसू बहाता गार्डन, संरक्षित होने को तरसते तालाब
नगर के वार्ड क्रमांक 2 में स्थित एक विशाल गार्डन दशकों से अपने उद्धार की बाट जोह रहा है। नपा (नगर पँचायत) द्वारा केवल बाहरी दीवार घेरने का काम किया गया, लेकिन गार्डन के भीतर हरियाली विकसित करने, पौधारोपण और रखरखाव की कोई ठोस पहल नहीं हुई। 2 -4 झूले लगे तो भी गर्दन के किनारे बिना साफ सफाई या झाड़ झंखाड़ हटाये किनारे में लगा दिए गए। यही हाल शहर के अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों का भी है। मैनामुड़ा तालाब, मुरली तालाब और अन्य जल संरचनाएं देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व खोने की कगार पर हैं।
नगर विकास के नाम पर योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन बजट के प्रावधानों के बावजूद उनका सही क्रियान्वयन कभी नहीं हो सका। योजनाओं में पैसा बहता रहा, मगर शहर को एक सुव्यवस्थित गार्डन देने के लिए कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।
गर्मियों में पेयजल संकट, समाधान की दरकार
हर वर्ष गर्मी के दिनों में घरघोड़ा को भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके, अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नगर में कोई दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई गई, जिससे हर गर्मी में समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है।
शहर को इंतजार है उस ‘नायक’ का
नगर के नागरिक अब ऐसे नेतृत्वकर्ता की तलाश में हैं, जो घरघोड़ा को अपनी जिम्मेदारी समझकर संवारे और विकसित करे। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि घरघोड़ा के कायाकल्प का चुनाव साबित हो सकता है। सवाल यह है कि इस बार शहर की जनता को उनका ‘नायक’ मिलेगा या नहीं? कौन होगा वह नेता जो शहर के वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता देकर गार्डन, तालाबों और पेयजल संकट का समाधान करेगा?
अब देखना यह होगा कि जनता इस चुनाव में अपने अधिकारों और विकास के मुद्दों पर किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और कौन जनता की नब्ज समझ और पकड़ पाता है ।





