धरमजयगढ़ के ग्रामीणों व जनप्रतिनिधि की ‘सहमति’ पर सवाल, प्रशासन बोला हाँ – जनप्रतिनिधि अब भी खामोश !!
क्या आदिवासी विधायक, आदिवासियों के हक़ में डटकर खड़े रहेंगे ??
रायगढ़।पूरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना को लेकर एक बार फिर सवालों का दौर तेज हो गया है। जिला प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया है कि ग्राम पुरुंगा, तेन्दुमुड़ी, साम्हरसिंघा और कोकदार के ग्रामीणों ने आगामी 11 नवंबर को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई में शामिल होने की सहमति दे दी है। प्रशासन का कहना है कि यह सहमति संवादात्मक पहल और लगातार बैठकें करने के बाद मिली है।लेकिन इस दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं।दरअसल, पिछले दिनों ही धरमजयगढ़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और विधायक लालजीत राठिया ने कलेक्ट्रेट रायगढ़ पहुंचकर अडानी पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना का विरोध दर्ज कराया था। ऐसे में अचानक प्रशासन का ये कहना कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने “सहमति दे दी”- कई लोगों को हैरान कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला खदान से प्रभावित गांवों की चिंताएं अब भी जस की तस है- जमीन, मुआवजा, पर्यावरण और विस्थापन जैसे मुद्दे अभी तक स्पष्ट नहीं हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि -क्या ग्रामीण सच में सहमत हुए हैं ??या फिर यह प्रशासन का दावा मात्र है ताकि प्रस्तावित जनसुनवाई को किसी तरह सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में अब निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब इस परियोजना की जनसुनवाई होनी है। उस दिन ही साफ़ होगा कि ग्रामीणों की “सहमति” कितनी सच्ची है और प्रशासन का दावा कितना ठोस।
प्रशासन के इस “सहमति” दावे के बाद अब नज़रें धरमजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया पर टिक गई हैं।
विधायक राठिया ने लगातार पूरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना का विरोध किया है और कहा था कि ये परियोजना आदिवासी क्षेत्र के हितों के विपरीत है।अब जब प्रशासन ये दावा कर रहा है कि प्रभावित गांवों ने सहमति दे दी है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विधायक अपने पुराने रुख पर कायम रहते हैं, या प्रशासन उन्हें भी “सहमति के खेमे” में शामिल करने में सफल होता है।जनता के बीच अब यह सवाल गूंज रहा है..





