डीएमएफ परियोजनाओं की निगरानी अब क्यूआर कोड से, घरघोड़ा में शुरू हुआ रियल-टाइम सोशल ऑडिट सिस्टम

 

हर निर्माण स्थल पर लगेगी क्यूआर पट्टिका, स्कैन करते ही मिलेगी परियोजना की पूरी जानकारी; भुगतान से पहले क्यूआर पट्टिका की जियो-टैग फोटो अनिवार्य

इस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी प्रत्येक परियोजना स्थल पर लगाई जाने वाली वेदरप्रूफ क्यूआर कोड पट्टिका होगी। पट्टिका को स्कैन करते ही नागरिक परियोजना से संबंधित डिजिटल जानकारी तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए किसी विशेष मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होगी। सामान्य स्मार्टफोन कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर परियोजना की स्वीकृत लागत, संबंधित एजेंसी, तकनीकी जानकारी और प्रगति से जुड़ी जानकारी देखी जा सकेगी। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों और ग्राम सभाओं को अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी सीधे देखने और उसकी प्रगति की निगरानी करने का अवसर मिलेगा। इस तरह परियोजनाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी।

जिला प्रशासन ने परियोजनाओं में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भुगतान प्रक्रिया को भी क्यूआर प्रणाली से जोड़ा है। संबंधित ठेकेदार या विभाग को कार्यस्थल पर स्थापित क्यूआर पट्टिका की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प वाली फोटो अपलोड करनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित माइलस्टोन भुगतान बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नई व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 24 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें घरघोड़ा विकासखंड में डीएमएफ के तहत कार्य करने वाली एजेंसियों के संबंधित अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, इंजीनियर और पोर्टल ऑपरेटर शामिल हुए। प्रशिक्षण में पोर्टल के उपयोग, विभागीय प्रविष्टियां करने, सिस्टम वेरिफिकेशन, परियोजना कोड जनरेशन तथा कार्यस्थल पर क्यूआर पट्टिका लगाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को नई व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, इस डिजिटल व्यवस्था से डीएमएफ परियोजनाओं की पहचान, दस्तावेजों के रखरखाव, भुगतान प्रक्रिया और जमीनी निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा नागरिकों को अपने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त हो सकेगी।