घरघोड़ा के बैहामुड़ा में अब बनेगा मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार के एक मामले उद्यानिकी विभाग को टाइट किया तो पुराना प्रोजेक्ट फिर से जीवित हो गया। मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के नाम पर सवा करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए थे लेकिन धरातल पर हासिल शून्य था। इस मामले में जिला कलेक्टर ने कंसल्टेंट एजेंसी सिटकॉन को ही तलब कर लिया। एजेंसी ने उद्यानिकी विभाग के साथ बैहामुड़ा में प्लांट लगाने के लिए जगह तलाशी है। घरघोड़ा में बन रहा मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट अचानक से सुर्खियों में आया है।

रायगढ़ जिले के पांच आदिवासी ब्लॉक धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया में रोजगार के साधन बढ़ाने और मुनगा से पौष्टिक आहार बनाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने परियोजना मद से दो करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी। विशेष केंद्रीय सहायता के तहत केंद्र सरकार की ओर से आवंटन मिला था। इस राशि से उद्यानिकी विभाग को घरघोड़ा में मुनगा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का काम दिया गया था। दो करोड़ में 1.15 करोड़ की मशीनरी और 85 लाख का शेड बनाया जाना था। प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी रायपुर की कंसल्टेंसी सिटकॉन को दे दी गई। शेड बनाने का ठेका जैन एसोसिएट कंपनी को मिला था। लेकिन मई 2022 में निर्माणाधीन भवन ढह गया।

उद्यानिकी विभाग ने कहा कि हवा में निर्माण ढह गया। चार साल बाद उद्यानिकी विभाग ने आदिवासी विकास विभाग को 81 लाख रुपए लौटाए तो असलियत सामने आई। 1.19 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने सख्त रवैया दिखाते हुए जांच के आदेश दिए थे तब उद्यानिकी विभाग ने एजेंसी सिटकॉन की पूरी टीम को रायगढ़ बुलाया। बताया जा रहा है कि बैहामुड़ा में पुराने रीपा के शेड में मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा। कुछ मशीनें आनी बाकी हैं।

मौके पर तत्कालीन पीडब्ल्यूडी ईई ने जांच की थी। दीवार के साथ कॉलम भी उखडक़र गिर गए थे। ज्यादा गहराई में कॉलम डाले ही नहीं गए इसलिए ढांचा ढह गया। ठेकेदार ने गुणवत्ताहीन काम किया था। ठेकेदार को हुए भुगतान की के बारे में अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि 29,52,851 रुपए के भुगतान का हिसाब नहीं है। ठेकेदार को किए गए भुगतान की वसूली के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मतलब घटिया निर्माण करने पर भी सरकार भुगतान करेगी। मशीन खरीदने के लिए भी करीब 89 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया

प्रोसेसिंग प्लांट के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने का सिरदर्द शुरू नहीं हुआ है। घरघोड़ा यूनिट के लिए खरसिया के तेंदूमुड़ी में 9 हे. और धरमजयगढ़ के बकालो में 5 हे. भूमि पर मुनगा का रोपण कराया गया था। दोनों जगहों पर कुल मिलाकर 14.22 लाख रुपए खर्च हुए थे। लेकिन वहां ठूंठ भी नहीं बचे हैं। अब नए प्लांट के लिए कच्चा माल कहां से लाएंगे?