तमनार ब्लॉक में जिंदल पावर कोलमाइंस सेक्टर-1 की जनसुनवाई सोमवार को बंद कमरों में औपचारिक रूप से पूरी कर ली गई। 14 गांव के ग्रामीण सुबह से ही मानव शृंखला बनाकर जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर विरोध करते रहे। जिला प्रशासन का तंबू धौराभाठा मैदान में गड़ने नहीं दिया गया। तमनार ब्लॉक का धौराभाठा मैदान पुलिस फोर्स से पटा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित खदान से विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट का खतरा है, इसलिए वे जनसुनवाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार अधिसूचना में तय स्थान और समय पर जनसुनवाई करना अनिवार्य है। नियमों का पालन न होने पर यह जनसुनवाई एनजीटी में मान्य नहीं होगी। इसी को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। उन्होंने विरोध को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
आनन-फानन में औपचारिकता पूरी कर लौटे प्रशासन के अधिकारी। जनसुनवाई के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और प्लांट के अधिकारी मौके पर पहुंचे। विरोध देखते ही बिना नई अधिसूचना जारी किए जगह बदल दी गई और बाज़ार के शेड में जनसुनवाई की गई। अधिकारी एनाउंसमेंट करते रहे, लेकिन ग्रामीण बाजार परिसर में विरोध करते रहे। दोपहर 1 बजे सभी प्रक्रिया पूरी कर अधिकारी-कर्मचारी लौट गए।

छावनी में तब्दील हुआ क्षेत्र, 4 हजार जवान तैनात
जनसुनवाई के एक दिन पहले जिले भर से पुलिस बल तैनात किया गया। 4 हजार से अधिक जवान मौके पर थे। वहीं 14 गांव के 10 हजार से अधिक लोग विरोध में थे। धरने के कारण न टेंट लग पाया और न तय समय पर सुनवाई हो सकी। अंततः प्रशासन ने धरना स्थल से 200 मीटर दूर गिने-चुने लोगों के साथ प्रक्रिया पूरी कराई।
इधर जनसुनवाई के विरोध के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सफेद गमछा पहने एक व्यक्ति भरे मंच से माइक पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी और कलेक्टर को आपत्तिजनक शब्दों में गाली देता दिख रहा है। वीडियो में मंच पर कांग्रेस नेता और प्रभावशाली लोग मौजूद दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, जिस पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर चुटकी ली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीति में शब्दों की मर्यादा नहीं होनी चाहिए और खुले मंच से मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कितना उचित है? साथ ही जिले की भाजपा संगठन की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है।





