ठंड से बढ़ी बच्चों की परेशानी, सुबह की पाली के स्कूलों का समय बदलने की मांग

 

 

बढ़ती ठंड में नौनिहालों पर संकट, पालकों ने प्रशासन से की अपील

 

घरघोड़ा।नवंबर के दूसरे पखवाड़े में अचानक बढ़ी ठंड ने सुबह की पाली में लगने वाले स्कूलों के बच्चों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। ठंडी और कोहरे भरी सुबह में बच्चों का समय पर स्कूल पहुंचना एक चुनौती बन गया है। छोटे बच्चों को सुबह-सुबह तैयार करना और ठंड में स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पालकों ने इस स्थिति को देखते हुए स्कूलों का समय बदलने की मांग की है।  

 

बच्चों की सेहत पर खतरा

 

तेज ठंड और घने कोहरे के बीच सुबह 7 बजे स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंडी हवाओं के बीच बाहर निकलने के कारण बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पालकों का कहना है कि सुबह इतनी जल्दी स्कूल शुरू करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।  

“बच्चों को इतनी सुबह ठंड में स्कूल भेजना सही नहीं है। उनकी सेहत पहले से प्रभावित हो रही है। प्रशासन को जल्द ही स्कूलों का समय बदलना चाहिए,” एक चिंतित पालक ने कहा।  

ग्रामीण बच्चों के लिए अधिक कठिनाई

 

विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए यह समस्या और गंभीर हो रही है। अधिकांश बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जाते हैं, और कोहरे और ठंड के कारण उनका सफर जोखिम भरा हो गया है। कई पालक अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सुबह की पाली वाले स्कूलों का समय कम से कम 9 बजे किया जाना चाहिए।  

 

प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर दबाव

 

पालकों ने प्रशासन से अपील की है कि वे बढ़ती ठंड को ध्यान में रखते हुए स्वतः संज्ञान लें और स्कूलों के समय में बदलाव करें। पालकों का कहना है कि बच्चों की सेहत प्राथमिकता होनी चाहिए और प्रशासन को इस पर त्वरित निर्णय लेना चाहिए।  

कुछ स्कूल प्रबंधन ने भी पालकों की चिंताओं को सही ठहराया है। उनका कहना है कि बढ़ती ठंड में बच्चों को स्कूल बुलाना मुश्किल है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन प्रशासन के निर्देशों का इंतजार कर रहा है।  

 

बच्चों की सुरक्षा की मांग

 

बढ़ती ठंड और कोहरे के बीच नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर पालकों में चिंता गहराती जा रही है। उनके अनुसार, समय पर निर्णय न लिया गया तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे पर उचित कदम उठाएगा।