घरघोड़ा तहसील में राजस्व कर्मचारियों की कारगुजारी ने रेलवे लाइन का काम रुकवा दिया । तमनार ब्लॉक में 14 किलोमीटर लंबी रेल लाइन प्रस्तावित है। यह लाइन छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जेनरेशन कम्पनी लिमिटेड और महाजेनको (महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी) को मिलने वाली कोयला खदानों से रेल कॉरिडोर को जोड़ने के लिए बनाई जानी है। भूअर्जन में जमीन और उन पर परिसम्पत्तियों की गणना गलत तरीके से कर करोड़ों रुपए का बोगस मुआवजा बनाए जाने पर आपत्ति के बाद राजस्व विभाग ने कुछ प्रकरणों में संशोधन कर दिया। पूरे मामलों का निराकरण नहीं होने के कारण रेलवे लाइन का काम अटक गया है।रेलवे लाइन बनाने वाली सरकारी कम्पनी इस्कॉन की आपत्ति के बाद अब महाजेनको रेलवे लाइन के लिए मुआवजे की राशि ही नहीं दे रहा है। अफसरों का कहना है कि मुआवजे के प्रकरणों में ईमानदारी बरती गई होती तो रेलवे लाइन का काम नहीं अटकता । घरघोड़ा सबडिवीजन के अंतर्गत ही तमनार आता है।तमनार खदान क्षेत्र है। यहां एसईसीएल की खदान (एमडीओ) के साथ ही महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कम्पनी, सीएसपीजीसीएल जैसी सरकारी खदानों के साथ ही निजी कम्पनियों की खदान हैं। परिवहन ज्यादा होने के कारण फ्रेट कॉरिडोर के तहत रेलवे लाइन बनाई जा रही है,ताकि मालगाड़ी के जरिए परिवहन हो ।
बोगस मुआवजा बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं
तमनार के 6 गावों से 14 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जानी थी। जो जमीन रेलवे लाइन में आ रही थी उन पर निर्माण, पेड़-पौधे यानि परिसम्पत्तियों की गणना बढ़ाकर की गई । इरकॉन की आपत्ति के बाद न केवल कुछ गांव और खसरा नंबर में पहले दिखाई गई परिसम्पत्तियां कम हुई बल्कि राशि भी कम हो गई। पहले गलती करने वाले तहसीलदार, आरआई,पटवारी, पशुधन विकास, पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की गई। इस पर एसडीएम रमेश मोर ने बताया कि मामला उनके आने से पहले का है। किसी को दोषी या किसी तरह की कार्रवाई की अनुशंसा नहीं की गई।
बजरमुड़ा घोटाला: दो पटवारियों को किया सस्पेंड, रिकवरी का कोई प्रयास नहीं हुआ
बजरमुड़ा में घोटाले के बाद हुई शिकायतों के बाद शासन ने जांच कराई।जांच टीम ने छह महीने में एक-एक खसरे की जांच कर धांधली और भ्रष्टाचार की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट के बाद दो पटवारियों को सस्पेंड किया गया। गड़बड़ियां बड़े अफसरों के इशारे पर हुईं लेकिन पोल खुली तो पटवारी को बलि का बकरा बनाया गया। शासन की जांच रिपोर्ट में लिखा है कि मुआवजे की गणना फिर से की जाए। यह स्पष्ट नहीं है कि गलत गणना कर करोड़ों का मुआवजा बांटने वाले इन लोगों पर कार्रवाई करें। मुआवजे की नई गणना करने के बाद एसडीएम से साठगांठ करके करोड़ों का बोगस मुआवजा लेने वालों से रिकवरी, उनके खाते होल्ड करने जैसी कार्रवाई का जिक्र भी नहीं है। इस लचर कार्रवाई से दूसरे प्रकरण में भी गबन की तैयारी कर की गई, हालांकि इरकॉन की सजगता से मुआवजा बंटने से पहले मामले उजागर हो गया।
इरकॉन के अपर महाप्रबंधक ने लिखा पत्र भालूमुड़ा में गारे पेलमा रेलवे लाइन के पूरक-5 के अंतर्गत प्रभावित 6 गांव में निजी भूमि का फिर से सर्वे कराने के लिए इरकॉन के अपर महाप्रबंधक ने अपर कलेक्टर को दिसंबर 2022 में ही पत्र लिखा था। राजस्व विभाग के सर्वे के बाद मुआवजे की गणना ज्यादा लगने के बाद इरकॉन ने अपने स्तर पर सर्वे करके बाकायदा खसरा नंबर और भूमिस्वामी के नाम के साथ बताया था कि जहां दो मंजिला मुर्गी फॉर्म बताया गया, वहां टेम्पोरेरी शेड्स हैं और मुर्गी नहीं हैं। पत्र के साथ चितवाही में 40, भालूमुड़ा में 34,रोडोपाली 2 और डोलनारा में 21 भूअर्जन प्रकरणों पर आपत्ति जताई थी। यहीं सबसे ज्यादा मुर्गी फॉर्म बताकर परिसम्पत्तियों का मुआवजा ज्यादा बताया गया है।
मिलूपारा मामले की आपत्ति पर केमिश्नर कर रहे सुनवाई
रेलवे लाइन के लिए मुआवजा पत्रक संबंधी शिकायतों की ज्यादा जानकारी नहीं है। मिलूपारा के कुछ प्रकरणों की सुनवाई कमिश्नर कोर्ट में चल रही है। कटंगडीह गांव में एक लैंडलूजर को मुआवजा मिला है। पहले गलती के बाद मुआवजा पत्रक रिवाइज किया गया। इस पर किसी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई है और न ही अनुशंसा की गई है।
रमेश मोर, एसडीएम





