पोरडा – एसईसीएल द्वारा पोरडा में किए गए भू-अधिग्रहण का मुआवजा विवाद का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 2009-10 में राई ईस्ट और राई वेस्ट परियोजना के नाम पर अधिग्रहित भूमि का नाम बदलकर बरौद (विस्तार) खुली खदान कर दिया गया है। 14 साल बाद वितरित किए गए मुआवजा पत्रकों में भी भारी त्रुटियां हैं, जिसमें कुएं, बोर, खसरा नंबर, मकान और बरामदे जैसी महत्वपूर्ण जानकारी गायब है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आज की दरों के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा मिलना चाहिए। इसके साथ ही, ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि 2009-10 में प्रकाशित राजपत्र, जिसका नाम बदलकर बरौद विस्तार किया गया, की प्रति उन्हें अभी तक नहीं मिली है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आज ग्राम पोरडा में ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें समीर गिरी सहित ग्रामीणों ने एसईसीएल के खिलाफ सामूहिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। यदि एसईसीएल उनकी मांगों को नहीं मानता है, तो ग्रामीण आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं।
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