घरघोड़ा में चुनावी सुगबुगाहट धीमी, प्रचार का जोश गायब!

 

घरघोड़ा-घरघोड़ा नगर पंचायत चुनाव की दुंदुभी बज चुकी है, नामांकन की आखिरी तारीख भी गुजर गई, लेकिन अब तक शहर में चुनावी रंगत नजर नहीं आ रही। आमतौर पर चुनावी मौसम में गलियों और चौक-चौराहों पर राजनीतिक चर्चाओं की गहमागहमी रहती थी, लेकिन इस बार का मंजर बिल्कुल अलग है। शहर की गलियां न पोस्टरों से सजी हैं, न बैनरों की बहार है, और न ही वार्डों में प्रत्याशियों की चहलकदमी दिख रही है। प्रत्याशी भी अभी तक अपनी अंटी बांधे बैठे हैं और अंदरखाने की रणनीति साधने में जुटे हैं।

 

शहर में ठंडी पड़ी चुनावी सरगर्मी

 

चुनावी मैदान में कूद चुके उम्मीदवार अब तक जनता के बीच खुलकर नहीं आए हैं। चाय दुकानों और चौपालों पर भी चुनावी बहस की गर्माहट गायब है। केवल इक्का-दुक्का उम्मीदवारों के समर्थक बकरे-मुर्गे की पार्टियों से माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पारंपरिक चुनावी उत्साह अब तक सिरे नहीं चढ़ा है। चुनाव प्रचार की शांति ने मतदाताओं के बीच भी जिज्ञासा बढ़ा दी है कि आखिरकार प्रचार की असली लहर कब उठेगी।

 

नाम वापसी के बाद पकड़ेगा जोर

 

जानकारों का मानना है कि नाम वापसी की तारीख, यानी 31 जनवरी के बाद चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी। जब मुकाबले की असली तस्वीर साफ होगी, तब प्रत्याशी पूरी ताकत झोंक देंगे। प्रचार में अब तक रुपये-पैसे का विशेष जोर नहीं दिखा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह सेवा-सुश्रुषा का दौर शुरू होगा और प्रत्याशी तन, मन और धन से मतदाताओं को रिझाने में जुट जाएंगे।

 

आखिरी दिनों में गरमाएगा चुनावी माहौल

 

राजनीतिक पंडितों की मानें तो घरघोड़ा में चुनावी रंगत अंतिम दिनों में चढ़ेगी। जैसे-जैसे मतदान की घड़ी नजदीक आएगी, वैसे-वैसे शहर में चुनावी सुरूर नजर आने लगेगा। जनता भी प्रत्याशियों की रणनीति पर पैनी नजर बनाए हुए है। अब देखना यह होगा कि इस ठंडे चुनावी माहौल में कौन सा प्रत्याशी गर्मजोशी के साथ आगे आता है और जनता का दिल जीत पाता है।