धरमजयगढ़ में अडानी कोल माइंस के खिलाफ जनआक्रोश तेज, दो विधायकों ने संभाला किसानों का मोर्चा!

कोल ब्लॉक के विरोध में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सांसद राधेश्याम राठिया की चुप्पी पर नाराजगी

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित अडानी कोल माइंस जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार प्रखर होता जा रहा है। प्रभावित गांवों के लोग अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। इसी कड़ी में आज ग्राम पुरूंगा में एक विशाल जनमहासभा का आयोजन किया गया, जिसमें पुरूंगा, तेंदूमुड़ी और साम्हरसिंगा सहित आसपास के अंचलों से भारी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।

वहीं महासभा में कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक फुलसिंह राठिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंच से किसानों की आवाज़ को बुलंद करते हुए कहा,

“हम किसान के हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसी भी हाल में अडानी कोल माइंस की जनसुनवाई को रद्द कराना होगा। यह केवल एक गांव या एक समुदाय का नहीं, बल्कि हमारी धरती और अस्तित्व की लड़ाई है। इस मुद्दे को मैं विधानसभा में भी जोरदार तरीके से उठाऊँगा।”

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक लालजीत राठिया भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों के समर्थन में अपने अडिग रुख को दोहराते हुए कहा

“मैं पहले भी अपने क्षेत्र के किसानों के साथ था, आज भी उनके साथ खड़ा हूँ। हमारे धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में किसी भी ऐसी परियोजना की जगह नहीं है, जो हमारे पर्यावरण, जल-जंगल-जमीन या लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाए। हम अडानी जैसी कंपनी के खिलाफ डटकर मुकाबला करेंगे।”

और वहीं सभा में ग्रामीणों ने भी एक स्वर में अपनी मांग रखी कि जब तक जनसुनवाई रद्द नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। सभा के दौरान नारे गूंजते रहे — “जल-जंगल-जमीन हमारी है, नहीं किसी के बाप की जागीर है !”

कोल ब्लॉक के विरोध में आयोजित आमसभा के दौरान ग्रामीणों ने सांसद राधेश्याम राठिया पर खुले मंच से जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद ने कोल ब्लॉक के विरोध और जनसुनवाई के दौरान चुप्पी साधे रखी तथा ग्रामीणों के आंदोलन में उनका साथ नहीं दिया। लोगों का कहना था कि जब सांसद हमसे वोट मांगने आएंगे, तभी हम उनसे बात करेंगे। सभा में मौजूद ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर पुरुंगा कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं करेंगे।

बहरहाल धरमजयगढ़ की यह महासभा अब सिर्फ विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि एकजुटता और पर्यावरण-संरक्षण की आवाज़ बनकर उभर रही है।